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कालचक्र

आज से 3000 वर्ष पहले।


एक वीर योद्धा अश्वत्थामा

जिनके तलाश से हमारा अस्तित्व है।


वे आज सत्र 2021


में एक नए काल का आगमन हुआ।


सत्र 2036


kनसंक ने इसे संसारित का माध्यम बनाया एक लक्ष्य के लिए जो मानव का भविष्य है।

तारीख 28/02/2020
समय : 22:42

जगह भारत


अरे आज देर हो गयी है मैं कल मिलूंगा वो बिज़नेस मीटिंग भी तो करना है।

रास्ते मे चंद्रमा अपने प्रकाश से रास्ते को एक सिल्वर धातु की तरह चमक रहा है।


रास्ते पर एक जगह रुक कर उसे दो मिनट देख लिया जाए और मैं एक सुनसान रास्ते पर उसकी सुंदरता को देखते हुए कुछ फोटो खींचने लगा

तभी एक तेज़ प्रकाश स्तम्भ पृथ्वी से आसमान तक दिखता है ।

सत्र 2145

तारीख 07/09/2145
समय 12:28

टीवी पर


अभी अभी इंसानो ने एक नए ग्रह पर जीवन की तलाश की है और हम अकेले नही हैं कहा।
ये हमारे पृथ्वी से भी ज्यादा बड़ा और बेहतर है।
हम यहां उतर गए हैं और किसी कृतिम प्रणाली के उपयोग बिना यहां पृथ्वी जैसा ही जीवन है।
यहां सब कुछ है।

अब इंसान पृथ्वी से उस ग्रह की ओर जाने की तैयारी में लगा हुआ है।
क्योंकि पृथ्वी पर एक प्राकृतिक खतरे पर पहुंच गई है।

इस खबर के कुछ समय बाद एक सैलाब आता है।
जिससे पृथ्वी में केवल 13648ओ638ऊ2य8ओ3य
725447380
लोग जिंदा बचते हैं।

अभी सत्र 2021
ये तो एक मैग्नेटिक ऊर्जा की तरह पूरे शरीर पर स्थित हो गयी।
पूरा शरीर एक स्तम्भ के जैसे स्थिर हो गया कुछ समय के लिए और जब समय देखा तो ……..

जारी…..

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